फिच ने 2026 में उभरते बाजारों पर संकट की चेतावनी दी
फिच रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में बढ़ती भू-राजनीतिक अस्थिरता उभरते बाजारों (Emerging Markets) की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग पर दबाव डालेगी। पंक्ति 2: वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन और ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता पैदा की है; रक्षा खर्च बढ़ने से राजकोषीय संतुलन बिगड़ने का खतरा।
नई दिल्ली: वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने शुक्रवार को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में उभरते बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। फिच के अनुसार, साल 2026 में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम उभरते बाजार के देशों और वहां के जारीकर्ताओं (Issuers) के लिए क्रेडिट दबाव को काफी बढ़ा सकते हैं। हालांकि एजेंसी का बेस-केस पूर्वानुमान फिलहाल तटस्थ बना हुआ है, लेकिन बदलती वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां संप्रभु और कॉर्पोरेट साख (Creditworthiness) के लिए गंभीर ‘डाउनसाइड रिस्क’ पैदा कर रही हैं। रिपोर्ट में विशेष रूप से अमेरिका की बदलती विदेश नीति और यूरोप में बढ़ते क्षेत्रीय तनावों को निवेश के माहौल के लिए जोखिम कारक माना गया है।
पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में स्थिरता की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन 2026 की शुरुआत ने इस धारणा को बदल दिया है। ऐतिहासिक रूप से, उभरते बाजार बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील रहे हैं। वर्तमान में, लैटिन अमेरिका में वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो का हटाया जाना और ट्रंप प्रशासन की नई प्राथमिकताओं ने इस पूरे क्षेत्र में निवेशकों की धारणा को बदल दिया है। वहीं दूसरी ओर, ग्रीनलैंड को लेकर अटलांटिक के आर-पार बढ़ते विवादों ने पूर्वी यूरोप में सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। यह स्थिति तब पैदा हुई है जब दुनिया के कई देश अपनी अर्थव्यवस्था को महामारी के बाद के प्रभावों से उबारने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन अब रक्षा खर्च में अनिवार्य बढ़ोतरी के कारण उन्हें विकास की गति से समझौता करना पड़ सकता है।
सरकारी अधिकारी (वित्त मंत्रालय विशेषज्ञ): “हम वैश्विक परिस्थितियों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। रक्षा खर्च बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन हम कोशिश करेंगे कि इसका असर हमारे राजकोषीय घाटे और बुनियादी ढांचे के विकास पर कम से कम पड़े।”
विपक्ष/आलोचनात्मक आवाज़ (आर्थिक विचारक): “सरकार को यह समझना होगा कि केवल बाहरी स्थितियों को दोष देने से काम नहीं चलेगा। यदि संप्रभु रेटिंग गिरती है, तो विदेशी कर्ज महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा बोझ देश की आम जनता और उद्योगों पर पड़ेगा।”
विशेषज्ञ विश्लेषण (फिच रेटिंग्स विश्लेषक): “2026 में वित्तीय बाजारों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच की बढ़ती खाई उधार लेने की लागत (Borrowing Costs) और क्रेडिट स्प्रेड में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकती है। लिक्विडिटी के बावजूद जोखिम बरकरार है।”
प्रभावित पक्ष (उभरते बाजार के निवेशक): “भू-राजनीतिक जोखिम हमारे पोर्टफोलियो के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। अनिश्चितता के इस दौर में हम सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने की ओर अधिक झुक रहे हैं ताकि हमारे एसेट्स सुरक्षित रहें।”
जमीनी स्तर पर, भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा असर उभरते बाजारों के रक्षा बजट पर पड़ रहा है। पूर्वी यूरोप के देशों में रक्षा व्यय में रिकॉर्ड वृद्धि देखी जा रही है, जो शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों के बजट में कटौती का कारण बन रही है। इसके अलावा, सोने की बढ़ती कीमतों ने केंद्रीय बैंकों के आरक्षित भंडार (Reserve Positions) को तो समर्थन दिया है, लेकिन स्थानीय मुद्राओं में अस्थिरता के कारण आयात महंगा हो गया है। निवेशक अब उभरते बाजारों के बॉन्ड्स से पैसा निकालकर सुरक्षित बाजारों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे विकासशील देशों के लिए विदेशी फंडिंग जुटाना चुनौतीपूर्ण और महंगा होता जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘demonstration effect’ के कारण अमेरिका की नई नीतियां पूरे लैटिन अमेरिका को प्रभावित कर सकती हैं। यदि पूर्वी यूरोप में रूसी आक्रामकता या प्रतिबंधों का दौर बढ़ता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) फिर से बाधित हो सकती है। विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि जिन देशों के पास ‘External Buffers’ यानी विदेशी मुद्रा भंडार कम है, उनके लिए संप्रभु डिफॉल्ट (Sovereign Default) का जोखिम बढ़ सकता है। फिच की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि 2026 व्यापारिक हितों और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन साधने का एक कठिन वर्ष साबित होने वाला है।
आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों में इन जोखिमों पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। 2026 के मध्य तक कई उभरते बाजारों की रेटिंग समीक्षा की जानी है, जो वैश्विक वित्तीय प्रवाह को दिशा देगी। निवेशक ट्रंप प्रशासन के अगले राजनयिक कदमों और यूरोपीय रक्षा संधियों में होने वाले बदलावों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। फिच का कहना है कि वे अपनी रेटिंग में भू-राजनीतिक घटनाओं के आर्थिक प्रभाव को शामिल करना जारी रखेंगे, और यदि तनाव बढ़ता है, तो रेटिंग में गिरावट (Downgrades) की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
2026 उभरते बाजारों के लिए एक अग्निपरीक्षा जैसा है। जहाँ एक ओर तकनीकी विकास और वित्तीय तरलता के अवसर मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक स्थिरता की नींव को कमजोर कर रहे हैं। संप्रभु राष्ट्रों को अपनी राजकोषीय नीतियों में लचीलापन लाना होगा और विदेशी भंडार को मजबूत करना होगा। नागरिकों और निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और विविधीकृत निवेश रणनीतियों को अपनाने का है। अंततः, वैश्विक सहयोग ही वह एकमात्र रास्ता है जो इन बढ़ते आर्थिक दबावों को कम कर सकता है।