राहुल गांधी को बोलने से रोका, लोकसभा में हंगामा
नई दिल्ली। मंगलवार की दोपहर संसद भवन में ऐसा तूफान उठा कि पूरे देश की निगाहें लोकसभा की कार्यवाही पर टिक गईं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बोलने से रोक दिया गया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे के संस्मरणों का जिक्र करना चाहा, तो उन्हें बीच में ही रोक दिया गया। इस घटना के बाद संसद में जो हुआ, वह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय बन गया है।
क्या हुआ संसद में?
सोमवार को जब राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रख रहे थे, तो स्पीकर ओम बिड़ला ने उन्हें एक पत्रिका का प्रमाणीकरण करने को कहा। संसदीय परंपरा के अनुसार राहुल गांधी ने मंगलवार को अपना भाषण फिर से शुरू करते हुए उस दस्तावेज़ को प्रमाणित कर दिया। लेकिन इसके बावजूद उन्हें उस दस्तावेज़ का हवाला देने की इजाजत नहीं दी गई। यह बात राहुल गांधी को इतनी अखरी कि उन्होंने तुरंत स्पीकर को एक कड़ा पत्र लिखकर अपना विरोध दर्ज करा दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राहुल गांधी चीन के साथ 2020 में पूर्वी लद्दाख में हुई झड़प और कैलाश रेंज गतिरोध के बारे में बात करना चाहते थे। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि किसी अप्रकाशित संस्मरण या उस पर आधारित पत्रिका के लेख का हवाला नहीं दिया जा सकता। यह तर्क सुनकर विपक्ष भड़क उठा और संसद में जमकर हंगामा हुआ।
स्पीकर को लिखे पत्र में क्या कहा?
राहुल गांधी ने अपने पत्र में लिखा, “कल राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए आपने मुझे एक पत्रिका को प्रमाणित करने का निर्देश दिया था। मैंने आज अपना भाषण फिर से शुरू करते हुए उस दस्तावेज़ को प्रमाणित कर दिया। लंबे समय से चली आ रही परंपरा और पूर्व स्पीकरों के बार-बार दिए गए फैसलों के अनुसार, जो सदस्य सदन में किसी दस्तावेज़ का हवाला देना चाहता है, उसे उसे प्रमाणित करना होता है और उसकी सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है। एक बार यह शर्त पूरी हो जाने के बाद, स्पीकर उस सदस्य को उस दस्तावेज़ का हवाला देने की अनुमति देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोकना न केवल इस परंपरा का उल्लंघन है, बल्कि इससे एक गंभीर चिंता भी पैदा होती है कि विपक्ष के नेता के रूप में मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बोलने से रोकने का जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है। यह दोहराना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक प्रमुख हिस्सा था, जिस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।”
लोकतंत्र पर धब्बा
राहुल गांधी ने अपने पत्र में स्पीकर को याद दिलाया कि सदन के निष्पक्ष संरक्षक के रूप में हर सदस्य के अधिकारों की रक्षा करना उनका संवैधानिक और संसदीय दायित्व है। उन्होंने लिखा, “विपक्ष के नेता और हर सदस्य का बोलने का अधिकार हमारे लोकतंत्र का अभिन्न अंग है। इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार ने एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा कर दी है। संसदीय इतिहास में पहली बार, सरकार के कहने पर स्पीकर को विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकने के लिए मजबूर किया गया है। यह हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है, जिसके खिलाफ मैं अपना सबसे कड़ा विरोध दर्ज करता हूं।”
पीएम मोदी पर साधा निशाना
दिन में पहले राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि वे उन्हें संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के संस्मरण और एपस्टीन फाइलों के बारे में बोलने से “डरे हुए” हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री “समझौता” कर चुके हैं और “अत्यधिक दबाव” में हैं।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “पीएम मोदी समझौता कर चुके हैं। पीएम इतने डरे हुए हैं कि मुझे संसद में नरवणे, एपस्टीन फाइलों और टैरिफ पर उनके समर्पण के बारे में बोलने नहीं दे रहे।”
आठ सांसद निलंबित
संसद में हंगामे के बाद आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित कर दिया गया। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों पर नियमों का उल्लंघन करने और “कुर्सी पर कागज फेंकने” का आरोप लगाया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध के बारे में विशेष संदर्भ का जिक्र करने की जिद पर सदन में हंगामा हुआ।
सदन में दिन में दो बार कार्यवाही स्थगित की गई। दोपहर तीन बजे फिर से कार्यवाही शुरू हुई तो राहुल गांधी ने कहा कि वे पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरणों के बारे में किसी भी पत्रिका के लेख का हवाला नहीं देंगे, लेकिन कैलाश रेंज में चीन के साथ गतिरोध के दौरान चीनी कार्रवाई और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में टिप्पणी करेंगे।
निलंबित विपक्षी सांसदों में कांग्रेस के हिबी ईडन, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, मणिकम टैगोर, गुरजीत सिंह औजला, प्रशांत यादवराव पडोले, चमाला किरण कुमार रेड्डी और डीन कुरियाकोस तथा सीपीआई(एम) के एस वेंकटेसन शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
जानकारों का मानना है कि यह विवाद आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है। विपक्ष ने पूरे देश में इस मुद्दे को उठाने का फैसला किया है। राहुल गांधी का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे पर चर्चा होनी ही चाहिए और सरकार इससे बच नहीं सकती।
दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि किसी अप्रकाशित संस्मरण या उस पर आधारित लेख का हवाला देना संसदीय नियमों के खिलाफ है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या विपक्ष और सरकार के बीच कोई समझौता हो पाता है।
संसद में आज जो कुछ हुआ, वह सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं है। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों से जुड़ा सवाल है। क्या विपक्ष के नेता को बोलने का अधिकार नहीं है? क्या राष्ट्रीय सुरक्षा पर चर्चा नहीं होनी चाहिए? ये सवाल अब हर भारतीय के मन में उठ रहे हैं। जवाब तो समय ही देगा, लेकिन आज जो हुआ, वह भारतीय संसद के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।