रोल्स रॉयस भारत विस्तार: विकसित भारत 2047 को मिला ब्रिटिश इंजीनियरिंग दिग्गज का साथ
रोल्स रॉयस भारत विस्तार से 15000 नौकरियां और रक्षा तकनीक। जानें PM मोदी की बैठक के 7 बड़े फैसले। आत्मनिर्भरता का नया अध्याय।
रोल्स रॉयस भारत विस्तार योजना बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कंपनी के सीईओ तुफान एर्गिनबिल्गिक की महत्वपूर्ण बैठक के साथ नए आयाम में पहुंची। ब्रिटिश एयरोस्पेस निर्माता ने भारत में दुनिया का सबसे बड़ा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का संकल्प लिया, जो देश को यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के बाद कंपनी का तीसरा होम मार्केट बनाएगा। यह रणनीतिक साझेदारी विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रोल्स रॉयस भारत विस्तार: रक्षा आत्मनिर्भरता की नई इबारत
देश की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार योजना सामरिक महत्व रखती है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि चर्चा में नौसैनिक प्रणोदन प्रणाली, जेट इंजन सह-विकास और स्वदेशी पनडुब्बी तकनीक शामिल रही। भारत को अगले दशक में रक्षा आधुनिकीकरण के लिए लगभग 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है, और यह साझेदारी इस दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
इसके अलावा, कंपनी जटिल एयरो-इंजन घटकों का स्थानीय उत्पादन शुरू करेगी, जिससे पांच वर्षों में आयात निर्भरता 22 प्रतिशत तक कम हो सकती है। उन्नत सामग्री अनुसंधान सुविधाएं भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन के साथ मिलकर काम करेंगी। वहीं, यह तकनीकी हस्तांतरण मॉडल इजरायल और दक्षिण कोरिया की सफल रक्षा साझेदारियों के अनुरूप है, जहां निरंतर ज्ञान आदान-प्रदान ने आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग का निर्माण किया।
वैश्विक क्षमता केंद्र: दुनिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग हब बनेगा भारत
कार्यकारी उपाध्यक्ष शशि मुकुंदन ने बताया कि विस्तारित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में 3000 से अधिक उच्च कुशल इंजीनियर कार्यरत होंगे। बेंगलुरु और हैदराबाद टर्बाइन डिजाइन, कम्प्यूटेशनल फ्लूड डायनेमिक्स और डिजिटल ट्विन सिमुलेशन के प्राथमिक केंद्र बनेंगे। विश्लेषण बताते हैं कि यह सुविधा 2030 तक सालाना 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य की बौद्धिक संपदा उत्पन्न करेगी।
भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा और प्रतिस्पर्धी परिचालन लागत पश्चिमी सुविधाओं की तुलना में 40-45 प्रतिशत दक्षता लाभ प्रदान करती है। फलस्वरूप, कंपनी सात वर्षों के भीतर अपनी वैश्विक अनुसंधान गतिविधियों का 60 प्रतिशत भारतीय केंद्रों में समेकित करने का लक्ष्य रखती है। यह कॉर्पोरेट नवाचार रणनीति का मौलिक पुनर्गठन दर्शाता है।
विकसित भारत 2047: राष्ट्रीय विकास के साथ कॉर्पोरेट विकास का तालमेल
सूत्रों ने पुष्टि की कि यह साझेदारी सीधे तौर पर भारत के विकसित भारत 2047 रोडमैप का समर्थन करती है, जो 23 वर्षों में विकसित राष्ट्र का दर्जा प्राप्त करने को लक्षित है। सहयोग तीन महत्वपूर्ण स्तंभों को संबोधित करता है: एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता, उच्च प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में युवा रोजगार और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता।
इसके अलावा, विस्तारित संचालन आपूर्ति श्रृंखलाओं में लगभग 15000 प्रत्यक्ष नौकरियां और 45000 अप्रत्यक्ष पद सृजित करेगा। युवा-केंद्रित इंजीनियरिंग अप्रेंटिसशिप का उद्देश्य उन्नत प्रणोदन प्रौद्योगिकियों में सालाना 8000 विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना है। यह मानव पूंजी विकास घटक भारत के एयरोस्पेस कार्यबल आकलन में चिह्नित कौशल अंतराल को संबोधित करता है, जहां केवल 18 प्रतिशत इंजीनियरिंग स्नातकों के पास उद्योग-तैयार दक्षताएं हैं।
आत्मनिर्भर रक्षा: प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सह-निर्माण मॉडल
दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि जटिल विनिर्माण साझेदारियां वास्तविक तकनीक स्वदेशीकरण प्राप्त करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। पारंपरिक असेंबली-केंद्रित विदेशी सहयोग के विपरीत, यह ढांचा बौद्धिक संपदा के सह-निर्माण पर जोर देता है। भारतीय इंजीनियर उष्णकटिबंधीय संचालन स्थितियों, उच्च-ऊंचाई प्रदर्शन और धूलभरे वातावरण लचीलेपन के लिए मुख्य डिजाइन संशोधनों में भाग लेंगे।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले सीमित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों से एक प्रस्थान का प्रतिनिधित्व करता है। कंपनी ने चुनिंदा सैन्य इंजन प्रकारों के लिए उत्पादन अधिकार लाइसेंस देने की प्रतिबद्धता जताई। यह क्षमता विदेशी रखरखाव समर्थन पर निर्भरता को समाप्त करती है, जो भारत के रक्षा खरीद इतिहास में एक निरंतर कमजोरी रही है।
भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंध: CETA के बाद निवेश में तेजी
यह विकास भारत-यूके व्यापक आर्थिक व्यापार समझौते की पूर्णता के बाद आया है, जिसने एयरोस्पेस घटकों के लिए टैरिफ बाधाओं को 18 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दिया। भारतीय विनिर्माण क्षेत्रों में ब्रिटिश निवेश प्रवाह साल-दर-साल 127 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें एयरोस्पेस सबसे तेजी से बढ़ती श्रेणी के रूप में उभरा। राजनयिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह कॉर्पोरेट विस्तार भारत-यूके विजन 2035 के तहत स्थापित द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी ढांचे को मान्य करता है।
इसके अतिरिक्त, सुव्यवस्थित नियामक प्रक्रियाएं अब तेज़ प्रौद्योगिकी आयात अनुमोदन सक्षम करती हैं, जिससे नौकरशाही समयसीमा 18 महीने से घटकर 4 महीने हो गई है।
भविष्य की रूपरेखा: वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति
उद्योग पूर्वानुमान बताते हैं कि भारत 2032 तक वैश्विक एयरोस्पेस घटक निर्यात का 8 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर सकता है, जो वर्तमान 1.2 प्रतिशत हिस्सेदारी से बढ़कर होगा। रोल्स रॉयस भारत विस्तार व्यापक आपूर्ति श्रृंखला पारिस्थितिकी तंत्र विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य करता है, जिसमें 50-60 द्वितीय-स्तरीय विक्रेताओं के उत्पादन सुविधाओं के पास संचालन स्थापित करने की उम्मीद है।
आगे देखते हुए, योजनाओं में स्वदेशी विमान वाहक और पनडुब्बियों के लिए नौसैनिक प्रणोदन प्रणाली शामिल है, जो 15 वर्षों में संभावित रूप से 50-65 हजार करोड़ रुपये मूल्य की हो सकती है। महामारी के बाद नागरिक उड्डयन की वसूली इंजन रखरखाव सेवाओं के लिए अतिरिक्त मांग पैदा करती है। यह दोहरी-क्षेत्र विकास प्रक्षेपवक्र भारत को कंपनी के वैश्विक संचालन वास्तुकला में एक अनिवार्य केंद्र के रूप में स्थापित करता है।