सेलिना जेटली के भाई को न्याय: दुबई में 18 महीने बाद राहत!
नई दिल्ली। मंगलवार को बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के चेहरे पर 18 महीने बाद वह मुस्कान आई जिसका इंतजार पूरा परिवार कर रहा था। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए यूएई स्थित एक कानूनी फर्म को सेलिना के भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दे दी है। मेजर विक्रांत पिछले 18 महीने से दुबई में हिरासत में हैं और इस फैसले ने उनकी रिहाई की उम्मीद जगा दी है। सेलिना ने इस फैसले को अपने भाई की गरिमा की बहाली और लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा कदम बताया है। एक बहन का यह संघर्ष, एक परिवार की यह पीड़ा और अब न्याय की यह उम्मीद – यह कहानी हर भारतीय के दिल को छू गई है।
18 महीने की पीड़ा, आखिरकार मिली राहत
एएनआई से बात करते हुए सेलिना जेटली ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश ने यूएई में अलमर्री पार्टनर्स के वकीलों को मेजर जेटली का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी है और महीनों की अनिश्चितता के बाद उनके परिवार में नई उम्मीद लेकर आया है।
भावुक होते हुए सेलिना ने कहा, “यह हमारे लिए 18 महीने की लंबी लड़ाई रही है। आज, 18 महीने बाद, मेरे भाई और हमारे देश के सैनिकों को आखिरकार उनकी गरिमा वापस मिल गई है। न्यायमूर्ति ने कृपापूर्वक अलमर्री पार्टनर्स और यूएई में वकीलों के लिए मेजर विक्रांत कुमार जेटली का प्रतिनिधित्व करने का आदेश पारित किया है। हम उन्हें वापस लाना चाहते हैं, और मुझे यकीन है कि अब चीजें बहुत सकारात्मक दिशा में और बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगी।”
एक बहन की आंखों में आंसू और आवाज में उम्मीद – यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था। सेलिना ने 18 महीने तक अपने भाई के लिए लड़ाई लड़ी, कभी हार नहीं मानी और आखिरकार न्याय का दरवाजा खुल गया।
वकील ने बताया फैसले का महत्व
सेलिना के वकील, एडवोकेट राघव कक्कड़ ने इस आदेश को “बहुत सकारात्मक” और मेजर जेटली की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय को परिवार द्वारा दुबई में पहचाने गए एक वकील को नियुक्त करने का निर्देश दिया है। उन्होंने आगे समझाया कि नियुक्ति पत्र कानूनी टीम को मेजर जेटली से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त करने और उचित बचाव शुरू करने में सक्षम बनाएगा।
कक्कड़ ने कहा, “हमें दिल्ली हाईकोर्ट से वास्तव में एक अच्छा आदेश मिला है। न्यायमूर्ति ने विदेश मंत्रालय को उस वकील को नियुक्त करने का निर्देश देने पर सहमति जताई है जिसे हमने दुबई में ढूंढा था और जो विक्रांत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सहमत हो गया है। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नियुक्ति पत्र अब उन्हें विक्रांत से पावर ऑफ अटॉर्नी प्राप्त करने और विक्रांत के लिए उचित बचाव शुरू करने में सक्षम बनाएगा, और हम बहुत आशान्वित हैं, खासकर भारत और यूएई के बीच हुए समझौते के बाद, कि हम अपने सैनिक के लिए बहुत जल्द रिहाई सुरक्षित कर लेंगे।”
दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
मंगलवार को पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह एक कानूनी फर्म, अल मारी पार्टनर्स को दुबई और अबू धाबी में सेलिना जेटली के भाई मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए आदेश जारी करे। यह कानूनी फर्म मामले को मुफ्त में संभालने के लिए तैयार है।
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली की याचिका पर यह निर्देश जारी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि आदेश जारी करने में कोई बाधा है, तो उसे शपथ पत्र में उल्लेख करें। अगली तारीख 10 फरवरी है।
सेलिना के भाई पिछले 18 महीने से यूएई में हिरासत में हैं। फर्म का नाम उनके वकील राघव कक्कड़ ने एडवोकेट माधव अग्रवाल और सुराधीश वत्स की सहायता से सुझाया था। यह प्रस्तुत किया गया कि कानूनी फर्म मेजर (सेवानिवृत्त) विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुफ्त (प्रो बोनो) में तैयार है।
स्वतंत्र रूप से जुटाई गई जानकारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने स्वतंत्र रूप से मामले का विवरण प्राप्त किया है। विदेश मंत्रालय के वकील ने प्रस्तुतियों का विरोध किया। यह कहा गया कि फर्म का नाम विक्रांत जेटली द्वारा सुझाई गई चार कानूनी फर्मों की सूची में शामिल है। यह भी बताया गया कि विक्रांत जेटली ने दूतावास के अधिकारियों को बताया कि कानूनी फर्म को शामिल करने का निर्णय उनकी पत्नी चारु जेटली द्वारा लिया जाएगा।
सेलिना के वकील ने विरोध किया और तर्क दिया कि प्रतिवादी उस तथ्य को छिपा रहे हैं जो ईमेल में हुआ था। वकील ने प्रस्तुत किया कि वह अपनी पत्नी से बात नहीं करना चाहते।
एक सैनिक की पीड़ा, परिवार का संघर्ष
मेजर विक्रांत जेटली भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं। देश की सेवा करने वाले इस सैनिक को विदेश में हिरासत में रखा गया, यह खबर सुनकर हर देशवासी का दिल दुखा। लेकिन उनकी बहन सेलिना ने हार नहीं मानी। 18 महीने तक वह अदालत के चक्कर लगाती रहीं, वकीलों से मिलती रहीं और अपने भाई के लिए न्याय की गुहार लगाती रहीं।
यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं थी। यह एक बहन का अपने भाई के प्रति प्यार था, एक परिवार की एकजुटता थी और एक भारतीय सैनिक के सम्मान की रक्षा की लड़ाई थी। सेलिना के संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं होता।
भारत-यूएई संबंधों से बढ़ी उम्मीद
हाल ही में भारत और यूएई के बीच हुए समझौते ने इस मामले में नई उम्मीद जगाई है। दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्ते अब मेजर विक्रांत की रिहाई में सहायक हो सकते हैं। वकील राघव कक्कड़ ने भी इस बात का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बहुत आशान्वित हैं कि जल्द ही उनके सैनिक की रिहाई सुरक्षित हो जाएगी।
मुफ्त में मदद करने को तैयार वकील
इस पूरे मामले में एक और दिल छू लेने वाली बात यह है कि अल मारी पार्टनर्स कानूनी फर्म मेजर विक्रांत का केस बिल्कुल मुफ्त में लड़ने को तैयार है। प्रो बोनो यानी सार्वजनिक हित में बिना किसी शुल्क के यह सेवा देना, यह दिखाता है कि न्याय सिर्फ पैसे वालों के लिए नहीं है। इंसानियत अभी भी जिंदा है और लोग दूसरों की मदद के लिए आगे आते हैं।
आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई 10 फरवरी को होगी। विदेश मंत्रालय को अब कानूनी फर्म की नियुक्ति के लिए औपचारिक आदेश जारी करना होगा। एक बार यह हो जाने के बाद, वकील मेजर विक्रांत से पावर ऑफ अटॉर्नी लेकर उनका बचाव शुरू कर सकेंगे। सेलिना और उनका परिवार पूरी उम्मीद के साथ इस दिन का इंतजार कर रहा है।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले कुछ हफ्तों में मेजर विक्रांत अपने परिवार के पास वापस आ सकते हैं। यह खबर सुनते ही सेलिना की आंखों में खुशी के आंसू आ गए होंगे।
एक प्रेरणादायक कहानी
सेलिना जेटली की यह लड़ाई हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है जो किसी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर हौसला बुलंद हो, तो कोई भी मुसीबत टिक नहीं सकती। एक बहन ने अपने भाई के लिए 18 महीने तक संघर्ष किया और आखिरकार न्याय का दरवाजा खुल गया।
यह कहानी सिर्फ सेलिना और विक्रांत की नहीं है। यह हर उस परिवार की कहानी है जो किसी प्रियजन को खोने के डर से जूझ रहा है। यह हर उस सैनिक की कहानी है जिसने देश की सेवा की और अब संकट में है। यह कहानी उम्मीद की है, विश्वास की है और न्याय की जीत की है।
आज का दिन सेलिना जेटली और उनके परिवार के लिए एक नई शुरुआत है। अंधेरे के 18 महीने के बाद उम्मीद की एक किरण दिखाई दी है। और जल्द ही, बहुत जल्द, मेजर विक्रांत अपने घर वापस आएंगे। तब तक, सेलिना का यह संघर्ष हम सबके लिए प्रेरणा बना रहेगा।