बड़ी मांग: सीएम भगवंत मान ने नांदेड़ साहिब को ‘पवित्र शहर’ घोषित करने की वकालत की
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने महाराष्ट्र सरकार से तख्त श्री हजूर साहिब की पावन धरती नांदेड़ को ‘पवित्र शहर’ का दर्जा देने की मांग उठाई है।
सीएम ने नांदेड़ स्थित ‘पंजाब भवन’ के कायाकल्प और श्रद्धालुओं के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं के विस्तार की भी बड़ी घोषणा की।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शनिवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ स्थित तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब में माथा टेका और पंजाब की प्रगति व खुशहाली के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर उन्होंने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि पंजाब सरकार महाराष्ट्र सरकार के समक्ष नांदेड़ साहिब को ‘पवित्र शहर’ (Holy City) का दर्जा देने की मांग मजबूती से रखेगी। सीएम मान ने इस बात पर जोर दिया कि यह पावन नगरी न केवल सिखों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखती है। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब सरकार पहले ही अमृतसर साहिब, श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो को पवित्र शहर घोषित कर चुकी है और अब इसी तर्ज पर नांदेड़ के लिए भी प्रयास किए जाएंगे।
तख्त श्री हजूर साहिब सिख धर्म के पांच तख्तों में से एक है और इसका ऐतिहासिक महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि दसवें सिख गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन का अंतिम और महत्वपूर्ण समय इसी पवित्र धरती पर बिताया था। पंजाब सरकार ने पिछले साल नवंबर में श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर पर अमृतसर, तलवंडी साबो और श्री आनंदपुर साहिब के परकोटे वाले क्षेत्रों को ‘पवित्र शहर’ घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। मुख्यमंत्री मान का नांदेड़ दौरा और वहां की सुविधाओं के उन्नयन का संकल्प, प्रवासी पंजाबियों और श्रद्धालुओं को अपनी जड़ों और गुरुओं के दर्शन से बेहतर ढंग से जोड़ने की एक रणनीतिक पहल है।
भगवंत सिंह मान (मुख्यमंत्री, पंजाब): “नांदेड़ साहिब वह पवित्र स्थान है जहां गुरु गोबिंद सिंह जी ने मानवता को राह दिखाई। हम महाराष्ट्र सरकार पर दबाव डालेंगे कि इसे वह सम्मान मिले जिसका यह हकदार है।”
श्रद्धालु और स्थानीय निवासी: गुरुद्वारा परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने पंजाब भवन के नवीनीकरण और वेरका उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्णय का स्वागत किया।
विशेषज्ञ विश्लेषण: राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, “भगवंत मान का यह कदम धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ महाराष्ट्र में रह रहे पंजाबी समुदाय के बीच उनकी पकड़ को मजबूत करेगा।”
शाइन प्रबंधन: तख्त साहिब के प्रबंधन ने मुख्यमंत्री के आगमन और उनकी श्रद्धा को सराहनीय बताया, जिससे गुरुद्वारा और सरकार के बीच समन्वय और बेहतर होगा।
मुख्यमंत्री की घोषणाओं का सीधा असर नांदेड़ में पंजाब से आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों पर पड़ेगा। पंजाब भवन का सौंदर्यीकरण और वहां अत्याधुनिक सुविधाओं का समावेश ठहरने की व्यवस्था को सुगम बनाएगा। इसके अलावा, नांदेड़ में पंजाब के प्रसिद्ध ‘वेरका’ दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने से श्रद्धालुओं को घर जैसा खान-पान मिल सकेगा। जमीनी स्तर पर यह संदेश जा रहा है कि पंजाब सरकार राज्य की सीमाओं से बाहर स्थित ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के विकास के लिए भी उतनी ही गंभीर है।
राजनैतिक और सामाजिक दृष्टि से, भगवंत मान का यह दौरा ‘पैन-सिख’ (Pan-Sikh) पहचान को मजबूत करने की कोशिश है। ‘पवित्र शहर’ का दर्जा मिलने से नांदेड़ में मांस और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लग सकता है, जिससे शहर की मर्यादा और आध्यात्मिक आभा और अधिक बढ़ेगी। आर्थिक रूप से, सुविधाओं में सुधार से पर्यटन में वृद्धि होगी, जिसका लाभ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब सरकार का यह ‘सॉफ्ट पावर’ कूटनीति का हिस्सा है जो अंतर-राज्यीय संबंधों को धार्मिक और सांस्कृतिक सेतु के माध्यम से जोड़ता है।
आगामी हफ्तों में पंजाब सरकार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के साथ पत्राचार और बैठकों का दौर शुरू करेगी ताकि ‘पवित्र शहर’ की मांग को आधिकारिक रूप दिया जा सके। पंजाब भवन के नवीनीकरण का काम भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, पंजाब सरकार आगामी वर्ष गुरुओं से जुड़े अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर भी इसी तरह के आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बना रही है ताकि युवा पीढ़ी को गौरवशाली विरासत से जोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की नांदेड़ साहिब की यात्रा श्रद्धा और सेवा का एक उत्कृष्ट मेल है। पवित्र शहर के दर्जे की मांग और सुविधाओं के विस्तार का वादा यह दर्शाता है कि सरकार गुरु साहिबानों के दिखाए मार्ग पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान करती है, बल्कि विकास और विरासत को साथ लेकर चलने के संकल्प को भी मजबूती प्रदान करती है।