पंजाब reward policy: गैंगस्टर पकड़वाओ और ₹2 लाख पाओ
पंजाब सरकार ने वांछित अपराधियों और गैंगस्टरों की गिरफ्तारी के लिए ₹2 लाख तक की reward policy अधिसूचित की। जानें पूरी प्रक्रिया।
पंजाब सरकार ने गैंगस्टरों और वांछित अपराधियों को पकड़ने के लिए आधिकारिक तौर पर ‘इनाम नीति 2026’ को अधिसूचित (Notify) कर दिया है।
इस नीति के तहत, सूचना देने वाले नागरिकों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों को ₹1 लाख से ₹2 लाख से अधिक का नकद पुरस्कार दिया जाएगा।
पंजाब को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने 24 फरवरी, 2026 को ‘इनाम नीति’ को हरी झंडी दे दी है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य राज्य में सक्रिय गैंगस्टरों, भगोड़ों और आदतन अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना है। डीजीपी गौरव यादव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब अपराधियों के बारे में सटीक जानकारी देने वाले आम नागरिकों की पहचान गुप्त रखी जाएगी और उन्हें उनकी सूचना की गंभीरता के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। चंडीगढ़ में हुई कैबिनेट बैठक के बाद लिया गया यह निर्णय पुलिस और जनता के बीच सहयोग को एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है, जिससे राज्य में ‘गैंगस्टर-मुक्त पंजाब’ का सपना साकार होने की उम्मीद है।
पंजाब में लंबे समय से संगठित अपराध और सीमा पार से होने वाली गैंगस्टरी गतिविधियां एक बड़ी चुनौती रही हैं। ऐतिहासिक रूप से, अपराधियों पर इनाम देने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी और यह केवल पुलिस के विवेकाधिकार पर निर्भर करती थी। नीतिगत विकास के इस नए चरण में, सरकार ने पहली बार इनाम की राशियों और श्रेणियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया है। यह कानूनी ढांचा अपराधियों के मन में डर पैदा करने और जनता में सुरक्षा का भाव जगाने के लिए बनाया गया है। अब, अपराधियों को पकड़ना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामुदायिक मिशन बन गया है।
इस नीति के लागू होने पर अलग-अलग वर्गों की राय इस प्रकार है:
सरकारी अधिकारी: पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह नीति हमारे ग्राउंड इंटेलिजेंस को मजबूत करेगी। जब अपराधियों पर आर्थिक दबाव और जनता की नज़र होगी, तो उनका बचना नामुमकिन होगा।”
विपक्षी आवाज़: विपक्षी दलों ने नीति का स्वागत किया है लेकिन साथ ही चेतावनी दी है कि “इनाम राशि का वितरण निष्पक्ष होना चाहिए और सूचना देने वालों की सुरक्षा (Witness Protection) के लिए कड़े इंतजाम होने चाहिए।”
विशेषज्ञ विश्लेषण: रक्षा विशेषज्ञ रिटायर्ड कर्नल जसजीत सिंह के अनुसार, “यह एक ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) है। अपराधी अब अपने ही करीबियों पर भरोसा नहीं कर पाएंगे, क्योंकि उन पर लाखों का इनाम होगा।”
प्रभावित पक्ष: जालंधर के एक व्यापारी, जो रंगदारी (Extortion) से परेशान थे, ने कहा, “पहचान गुप्त रखने का वादा सबसे महत्वपूर्ण है। अब लोग बिना डरे पुलिस की मदद कर सकेंगे।”
इस नीति का कार्यान्वयन ज़मीनी स्तर पर पुलिस की कार्यप्रणाली को बदल देगा। अब एसएसपी (SSP) स्तर के अधिकारी ₹1 लाख तक, कमिश्नर और आईजी ₹1.5 लाख तक और डीजीपी ₹2 लाख से अधिक के इनाम की सिफारिश कर सकेंगे। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि विदेशों में बैठे और राज्य में छिपे गैंगस्टरों के बारे में ‘एक्शन योग्य’ जानकारी (Actionable Intelligence) में बढ़ोतरी होगी। आर्थिक प्रभाव के रूप में, यह अपराधियों के पारिस्थितिकी तंत्र को आर्थिक चोट पहुंचाएगा, क्योंकि उनके मुखबिर ही अब पुलिस के मुखबिर बन सकते हैं।
साक्ष्य-आधारित विश्लेषण बताता है कि यह मॉडल अमेरिका के ‘मोस्ट वांटेड’ सिस्टम से प्रेरित है। राजनीतिक रूप से, मान सरकार यह संदेश दे रही है कि वह कानून-व्यवस्था के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी। तुलनात्मक रूप से, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी ऐसी नीतियों ने अपराधियों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर किया है। कानूनी दृष्टि से, इनाम की राशि को ‘एक्स-ग्रेशिया’ भुगतान माना गया है, ताकि भविष्य में इस पर कोई कानूनी विवाद न हो।
आगामी महीनों में, पंजाब पुलिस एक डिजिटल ‘वांटेड’ डैशबोर्ड लॉन्च करने वाली है, जहाँ हर अपराधी की फोटो के साथ उस पर घोषित इनाम की राशि दिखाई देगी। मार्च 2026 के अंत तक, पहले बैच के इनामों के वितरण की उम्मीद है। हितधारकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी एंटी-गैंगस्टर हेल्पलाइन पर दें। भविष्य में इस नीति का विस्तार नशा तस्करों (Drug Smugglers) तक भी किया जा सकता है।
‘इनाम नीति 2026’ पंजाब में शांति और सुरक्षा की बहाली के लिए एक साहसिक पहल है। अपराधियों को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना और जनता को कानून का हिस्सा बनाना एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है। यह नागरिक जागरूकता का समय है कि हम अपराध के खिलाफ इस युद्ध में सरकार का साथ दें। संतुलित शब्दों में, यह नीति न केवल अपराधियों को पकड़ेगी, बल्कि समाज में कानून के शासन के प्रति विश्वास भी पैदा करेगी।