दुबई के ‘फरिश्ते’: मिसाइल संकट के बीच भारतीय कारोबारी ने 500 से अधिक फंसे हुए पर्यटकों के लिए खोले अपने घर के दरवाजे
दुबई में फंसे भारतीय पर्यटकों के लिए मसीहा बने व्यवसायी धीरज जैन। मिसाइल संकट के बीच अपने फार्महाउस पर दी मुफ्त भोजन और रहने की सुविधा।
दुबई में मिसाइल हमलों और उड़ानों के रद्द होने से मची अफरा-तफरी के बीच धीरज जैन और ममता जैन ने अपने आलीशान फार्महाउस को बनाया ‘सेवा का केंद्र’।
दुबई: मानवता और ‘सेवा परमो धर्म’ के सिद्धांत का एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश करते हुए, दुबई स्थित भारतीय व्यवसायी धीरज जैन और उनकी पत्नी ममता जैन संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में फंसे सैकड़ों भारतीयों के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। हालिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल और मिसाइल खतरों के कारण जब उड़ानें बड़े पैमाने पर रद्द हुईं, तो हजारों पर्यटक हवाई अड्डों पर बिना धन और आवास के फंस गए। ऐसी संकटपूर्ण स्थिति में, राजस्थान मूल के इस दंपत्ति ने अपने ‘जैनम जीविका फार्महाउस’ के दरवाजे खोल दिए। 500 से अधिक लोगों के लिए मुफ्त प्रवास, शुद्ध शाकाहारी भोजन और व्यक्तिगत परिवहन की व्यवस्था करके, जैन परिवार ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट को एक ऐतिहासिक “सेवा यज्ञ” में बदल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
क्षेत्रीय तनाव और यूएई के ऊपर मिसाइलों को रोके जाने की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक बुरा सपना पैदा कर दिया था। हवाई क्षेत्र बंद होने और प्रमुख विमानन कंपनियों द्वारा सेवाएं निलंबित किए जाने के कारण, कई भारतीय पर्यटक बेहद संवेदनशील स्थिति में आ गए थे—उनमें से कइयों का बजट खत्म हो चुका था और होटल बुकिंग की अवधि समाप्त हो गई थी।
ऐसे समय में जब संकट के दौरान अक्सर महंगाई और कीमतें बढ़ जाती हैं, जैन परिवार के हस्तक्षेप ने एक नई मिसाल पेश की। ऊना (हिमाचल प्रदेश) में अपनी जड़ों और अपने माता-पिता व आध्यात्मिक गुरुओं द्वारा दिए गए संस्कारों का पालन करते हुए, इस जोड़े ने अपने 11-बेडरुम वाले एस्टेट और विशाल मैदानों का उपयोग एक उच्च-क्षमता वाले आश्रय स्थल के रूप में किया।
अब तक क्या हुआ?
मिली जानकारी के मुताबिक, इस दंपत्ति ने साथी नागरिकों की सेवा के लिए लाखों दिरहम खर्च किए, लेकिन किसी भी बाहरी व्यक्ति से एक पैसा भी चंदा (Donation) लेने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने न केवल रहने की जगह दी, बल्कि ऑर्गेनिक भोजन और चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई।
संवाददाता ज्योति पटेल के अनुसार, फार्महाउस पर रहने वाले लोगों के तनाव को कम करने के लिए वहां योग और ध्यान सत्र भी आयोजित किए गए। जैन परिवार ने यह सुनिश्चित किया कि उनके बच्चे, जैनम और जीविका भी इस सेवा कार्य में शामिल हों, जिससे वहां एक ‘पिकनिक’ जैसा सकारात्मक माहौल बन गया।
अहम बातें
500+ लोगों को आश्रय: हवाई अड्डे पर फंसे पर्यटकों के लिए 11 कमरों और विशाल हॉल में रहने की व्यवस्था की गई।
निःस्वार्थ सेवा: भोजन, चिकित्सा सहायता और परिवहन के लिए लाखों का खर्च किया गया, लेकिन कोई दान स्वीकार नहीं किया गया।
मिसाल: संकट के समय में अपने निजी निवास को एक सार्वजनिक राहत शिविर में बदल दिया।
मानसिक स्वास्थ्य: मिसाइल हमलों के डर से सहमे लोगों के लिए विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग और योग की व्यवस्था की गई।
घरेलू अहसास: शुद्ध शाकाहारी भोजन और पारिवारिक माहौल ने पर्यटकों को घर जैसा अहसास कराया।
विशेषज्ञों और हितधारकों की राय
धीरज जैन (व्यवसायी और समाजसेवी): “हमने किसी पर कोई अहसान नहीं किया है; भगवान ने हमें सेवा करने का अवसर दिया। मेरे माता-पिता और गुरुदेव ने सिखाया है कि मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। हमारे स्टाफ और बच्चों को दिन-रात सेवा करते देखना ही सबसे बड़ा पुरस्कार था।”
चिकित्सा स्वयंसेवक (विशेषज्ञ विश्लेषण): “हमने वहां कई बुजुर्गों को भारी तनाव में देखा। फार्महाउस पर बनाया गया सकारात्मक माहौल और मेडिकल कैंप उन लोगों को मानसिक संकट से बचाने में बहुत मददगार साबित हुए।”
आम लोगों पर असर
एक फंसे हुए भारतीय पर्यटक ने भावुक होते हुए कहा, “हमारे पास होटल के लिए पैसे नहीं बचे थे और साथ में छोटे बच्चे थे। जब हमें जैन परिवार के बारे में पता चला, तो हमें विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने हमें केवल बिस्तर नहीं दिया, बल्कि एक परिवार का अहसास कराया। हम अजनबी बनकर आए थे और अब परिवार बनकर जा रहे हैं।”
धीरज जैन और ममता जैन की इस पहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय समुदाय की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। ‘दुबई के एंजेल्स’ कहे जाने वाले इस दंपत्ति ने साबित कर दिया है कि युद्ध और अनिश्चितता के समय में सांस्कृतिक विरासत और निस्वार्थ सेवा ही समाज के सबसे मजबूत स्तंभ हैं। अब जब उड़ानें धीरे-धीरे बहाल हो रही हैं, ये पर्यटक अपने साथ केवल यादें ही नहीं, बल्कि मानवता का एक बड़ा सबक लेकर अपने वतन लौट रहे हैं।