लिवर पर मंडराता खतरा! हर 4 में से 1 व्यक्ति होगा इस बीमारी का शिकार, वैज्ञानिकों की चेतावनी
लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, इसलिए इसकी देखभाल करना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ भी समय-समय पर लिवर के स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। हाल ही में एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। गलत खानपान और मोटापे के कारण होने वाली मेटाबॉलिक लिवर डिजीज (MASLD) एक वैश्विक महामारी बनने की ओर अग्रसर है। रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले 25 वर्षों में दुनिया की एक बड़ी आबादी इस बीमारी से प्रभावित होगी। चिंता की बात यह है कि यह बीमारी न केवल बुजुर्गों तक सीमित रहेगी, बल्कि युवाओं को भी अपनी चपेट में लेगी।
लैंसेट गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी मैग्जीन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 2050 तक दुनिया की लगभग 20% आबादी, यानी लगभग 200 करोड़ लोग मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीयोटिक लिवर डिजीज से पीड़ित होंगे।
वर्तमान आंकड़ों की बात करें तो, दुनिया भर में लगभग 1.3 अरब लोग MASLD से पीड़ित हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 30 वर्षों में इसमें 143% की वृद्धि हुई है, और हर 6 में से 1 व्यक्ति, यानी लगभग 16% लोग इससे पीड़ित हैं।
रिसर्च में पाया गया है कि 1990 में लगभग 5 करोड़ लोग MASLD से पीड़ित थे, और 2023 तक यह आंकड़ा बढ़कर 13 करोड़ हो गया। अनुमान है कि 2050 तक MASLD से 18 करोड़ लोग प्रभावित होंगे, जो 2023 की तुलना में 42% की वृद्धि दर्शाता है।
MASLD पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक पाया जाता है। यह बीमारी सबसे अधिक 80 से 84 वर्ष के बुजुर्गों में देखी जाती है, लेकिन वास्तव में इससे प्रभावित होने वाले अधिकांश लोग कम उम्र के होते हैं, यानी लगभग 35-39 वर्ष के पुरुष और 55-59 वर्ष की महिलाएं।
रिपोर्ट में सामने आया है कि इस बीमारी के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पश्चिमी खानपान और शारीरिक गतिविधि में कमी है। अधिक चीनी, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और सैचुरेटेड फैट का सेवन लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि गरीब और मध्यम आय वाले देशों में यह संकट और भी गहरा सकता है, क्योंकि वहां स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता की कमी है। लिवर में फैट जमने की यह प्रक्रिया शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जा रहा है। जब संकेत सामने आते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह बीमारी सीधे तौर पर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से जुड़ी हुई है। यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में कम उम्र में ही लिवर की बीमारियों के साथ लिवर फेलियर और लिवर कैंसर के मामलों में वृद्धि देखने को मिलेगी।
इसलिए, सभी को अपने खानपान का ध्यान रखना चाहिए, तैलीय चीजों से बचना चाहिए, और शारीरिक रूप से सक्रिय रहना चाहिए। अध्ययन में सरकारों से यह भी अपील की गई है कि वे मीठे पेय और जंक फूड पर टैक्स बढ़ाएं।