परिसीमन पर मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: विपक्ष के लिए महिला विरोधी कहलाने से बचने की चुनौती!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इसके लिए संसद के विशेष सत्र में महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक पेश किए जा रहे हैं। इन विधेयकों में एक प्रमुख विधेयक परिसीमन से संबंधित है, जिसका विपक्षी दल, विशेषकर दक्षिण भारत के नेता, कड़ा विरोध कर रहे हैं।
विपक्षी दलों के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है। अगर वे परिसीमन का विरोध करते हैं, तो उन्हें ‘महिला विरोधी’ के रूप में चित्रित किया जा सकता है, जो कि चुनाव के लिहाज से नुकसानदायक साबित हो सकता है। दूसरी ओर, अगर वे इसका समर्थन करते हैं, तो उन्हें अपनी राजनीतिक जमीन खोने का खतरा है, खासकर दक्षिण भारत में, जहां परिसीमन से सीटों की संख्या कम हो सकती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीजेपी ने एक जोखिम भरा कदम उठाया है? या फिर यह विपक्ष को घेरने और उन्हें दुविधा में डालने की एक सोची-समझी रणनीति है? राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह एक मास्टरस्ट्रोक है, जिसने विपक्ष को एक कठिन परिस्थिति में डाल दिया है। अब देखना यह है कि विपक्षी दल इस चुनौती से कैसे निपटते हैं और अपनी राजनीतिक साख को बचाते हैं।